दबंग आवाज के धनी -श्री शिवभगवान जी शर्मा

वैसे तो श्री शिव भगवान जी शर्मा किसी परिचय के मोहताज नहीं है क्यों की बगड ही नहीं अपितु आस पास के गाँवों के रामलीला के दर्शक उनको वर्षों से रावण के रोल में देखते आ रहे है | फिर भी यंहा उन के बारे में, मै आपको संक्षेप में बताने का यत्न करूँगा |

      श्री शिवभगवान जी शर्मा का जन्म २१ नवम्बर १९५५ को बगड में हुआ था | इनका बचपन बगड में ही बीता और इनकी स्कूल स्तर तक की शिक्षा बगड में ही हुई | कॉलेज की पढाई इन्होने सेठ मोतीलाल कॉलेज से की | उसके बाद इन्होने एक साल पीरामल स्कूल में क्लर्क के रूप में कार्य किया तत्पश्चात श्री गोपीकृष्ण शिक्षण महाविधालय से बी एड की पढाई की वंहा से अध्यापन की डिग्री लेकर कुछ समय पिरामल सीनयर सैकण्डरी स्कूल(बॉयज) में वाणिज्य विषय के अध्यापन का कार्य किया | उसके बाद थोड़े दिन रूंगटा सैकंडरी स्कूल ,आदर्शनगर (बगड )में कार्य किया वहां इनके द्वारा की गयी मेहनत के बलबूते पर स्कूल की शुरुआत बहुत अच्छी रही |ये अलग बात है की वर्तमान समय में प्रबंधको की लापरवाही के चलते अब ये स्कूल डांवांडोल स्थिति में है |

     थोड़े दिन निजिस्कूलो में अध्यापन के बाद इनका सरकारी अध्यापक की पोस्ट पर सलेक्सन हो गया | वर्तमान समय में आप सर्वशिक्षा अभियान (झुंझुनू )में सहायक जिला परियोजना समन्वयक अधिकारी (apc) के पद पर कार्य कर रहे है |
रावण के अभिनय में श्री शिवभगवान जी शर्मा 


जब मैंने उन से श्याम मंडल रामलीला समिति से जुडने के बारे में पूछा तो उन होने बताया की ये १९७८ के आसपास की बात है मुझे अचानक रामलीला में अभिनय करने का शौक हुआ इसके लिए मैंने लीला में कोइ रोल मांगा लेकिन उस समय मुझे रोल मिलने में काफी मुशिकल हुई बाद में मेघनाथ का रोल अस्थाई तौर पे करने के लिए मिला जिससे समिति के पदाधिकारी लोग संतुष्ट हुए | लेकिन एक दो साल बाद ही मेरी भारी आवाज और मजबूत कद काठी के कारण मेघनाथ की जगह रावण का रोल करने के सुझाव आने लगे | बस वंही से रावण का अभिनय करने का कार्य शुरू किया जो आज तक अनवरत रूप से जारी है और अब ३२ साल हो गए इस रोल को निभाते हुए |


दैनिक अखबार की कतरन जिसमे उनके अभिनय की प्रशंसा की गयी थी




































जिस किसी ने भी श्री शिवभगवान जी को रामलीला में अभिनय करते हुए देखा है वो निशंकोच यह कह सकता है की उनके इस अभिनय और आवाज के सामने दूर दूर तक के रावण फीके है | हमारे यंहा रामानंद सागर कृत रामायण धरावाहिक के रावण स्वर्गीय श्री अरविंद त्रिवेदी से उन की तुलना की जाती है | जब कभी उन्हें किसी कार्यक्रम में बुलाया जाता है तो वंहा उनसे रावण के संवाद बोलने का आग्रह किया जाता है भले ही कार्यक्रम किसी भी विषय में आयोजित किया गया हो |ये उनकी प्रसिद्धि का आलम है|
अब आप उनके द्वारा किये गए रावण के अभिनय का छोटा सा वीडियो देखिये 

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     श्री शर्मा जी समाज सेवी व्यक्ति है | उनको यह गुण विरासत में मिला है | इस कार्य हेतु उन्होंने अपने पिताजी जी श्री महावीरप्रसाद प्रसाद जी शर्मा के नाम पर एक ट्रस्ट (श्री एम.पी. मेमोरियल फैमिली ट्रस्ट ) बना रखा है | इस ट्रस्ट के तत्वावधान में उन के पिताजी की पुन्य तिथि पर हर वर्ष खेलो का आयोजन किया जाता है | बगड गाँव के खिलाड़ी एवं मेघावी छात्र छात्राओं को तथा श्रेष्ट अध्यापको को समानित किया जाता है |
रामलीला के चित्र और वीडियो भाई सुरेन्द्र जी के ब्लॉग मालीगांव की इस पोस्ट से लिये गए है |

1 comment:

  1. "जितनी कड़क आवाज-उतना ही मधुर व्यवहार , जितनी मजबूत कद-काठी -उतना ही सरल व्यक्तित्व "मेरी नजर में ऐसी है श्री शिवभगवान जी की शख्शियत !

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